Monday, 14 January 2019

महाकुम्भ के साथ भारतीय रेलवे

महाकुम्भ मेला , इसका भारतीय संस्कृति में बहुत बड़ा महत्व है , परन्तु पिछले कुछ कुम्भ के मेले में यह कुछ घटनाओ के कारण कुम्भ मेले पर कुछ धब्बे लगने लगे थे , धक्का मुक्की होना आम बात हो गयी थी कुम्भ के मेले को लोगो को बिछड़ने का स्थान बताया जाने लगा था। इस बार के कुम्भ मेले को ऐतिहासिक बनाने की योजना भाजपा सरकार द्वारा बनाई गयी व किसी कड़ी में पियूष गोयल जी की रेलवे ने इस कुम्भ के मेले को चार चाँद लगा दिए। आइये जानते है कैसे :-
१. प्रयागराज कुम्भ में रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं के लिए फर्स्ट एड, शौचालय, मोबाइल चार्जिंग, LED लाइट्स, CCTV कैमरा व LED स्क्रीन की सुविधाओं वाले वेटिंग रूम बनाये गए हैं ताकि कुम्भ में आने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा का एक सुखद एहसास लेकर जाएं विस्तार में जानने के लिए यहाँ क्लिक करे 

२.महाकुम्भ के लिए प्रयागराज  रेलवे स्टेशन को स्वच्छ और हाइजेनिक बनाया जा रहा है, श्रद्धालु इस कुम्भ से आस्था, श्रद्धा के साथ ही स्वच्छता और सेवा की एक बेहतरीन याद लेकर जाने वाले हैं https://twitter.com/PiyushGoyalOffc/status/1084416628782235649

३. महाकुंभ में आने वाले यात्रियों को टिकट संबंधी कोई परेशानी ना हो, इसके लिये रेलवेकर्मी हैंड हेल्ड मशीन द्वारा मेला क्षेत्र में ही टिकट बांटेंगे, ताकि श्रद्धालुओं को स्टेशन पर टिकट लेने की आवश्यकता ना पड़े विस्तार में जानने के लिए यहाँ क्लिक करे 

४. कुंभ के लिए पूरे देश से चलेंगी 800 ट्रेनें, सभी को कुंभ थीम से सजाया जाएगा, डिब्बों पर लिखे होंगे खास नारे और मैसेजhttps://www.bhaskar.com/uttar-pradesh/gorakhpur/news/800-trains-to-run-from-all-over-country-for-mahakumbh-in-gorakhpur-up-5999552.html

५. कुम्भ मेले के लिए रेलवे चलाएगा अतिरिक्त ट्रेनें, देशी-विदेशी श्रद्धालुओं के लिए 5 एसी ट्रेन भी चलेंगी, कुम्भ में आने वाले नागरिकों के लिए विशेष टिकट काउंटर बनाये गए हैं, इसके अलावा IRCTC की वेबसाइट अथवा मोबाइल ऐप से भी टिकट लिए जा सकते हैं|
 https://twitter.com/PiyushGoyalOffc/status/1082899515684712449

६. प्रयागराज तक यात्रियों को आसानी से सुरक्षित पहुंचाने के लिए रेलवे ने सुरक्षा भी विशेष ध्यान दे रहा है। श्रद्धालुओं के आने-जाने के साथ ही उनके ठहरने, खाने-पीने और साफ-सफाई के भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं। एनई रेलवे द्वारा रामबाग, दारागंज, झूंसी और प्रयागराज सिटी स्टेशन पर कुंभ यात्रियों के विशेष इंतजाम रहेंगे|

Tuesday, 8 January 2019

राफेल डील का सच WITH FACTS

#राफेल डील में ऑफसेट धनराशि का बंटवारा : संक्षिप्त विवरण
📌 36 राफेल जेट (हथियार+विशेष बदलाव के बाद) की लागत : 59000 करोड़ रुपए.
📌 गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील है, मतलब पैसा भारत सरकार फ्रांस सरकार को देगी.
📌 गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील में समझौते के मुताबिक सौदे का 50% ऑफसेट के रूप में भारत में निवेश करना होगा.
📌 50% ऑफसेट मतलब लगभग 30000 करोड़ रुपए.
📌 राफेल डील में मुख्य रूप से 4 कंपनियां है. जिनमें से 3 फ्रांस की कंपनी है और 1 भारत की कंपनी है.
📌 इन चारों में 50% ऑफसेट धनराशि (30000 करोड़ रुपए) का बंटवारा इस प्रकार हुआ है.. 👇
👉 1. THALES (फ्रांस) : 6300 करोड़ रुपए
👉 2. DASSAULT (फ्रांस) : 8400 करोड़ रुपए
👉 3. SAFRAN (फ्रांस) : 6300 करोड़ रुपए
👉 4. DRDO (भारत) : 9000 करोड़ रुपए
📌 ये चारों कंपनियां राफेल के अलग अलग मुख्य पार्ट्स बनाएंगी, जो इस प्रकार है.. 👇
👉 THALES : इलेक्ट्रॉनिक रडार और एयरक्राफ्ट में काउंटर मेजर्स बनाएगी.
👉 DASSAULT : एयरफ्रेम और सिस्टम इंटीग्रेशन बनाएगी.
👉 SAFRAN : M88 इंजन और लैंडिंग गीअर बनाएगी.
👉 DRDO : डिजाइन किए गए स्वदेशी "कावेरी जेट इंजन" को पूर्वरूप में लाने के लिए विशेषज्ञता की दिशा में जाएगा.
📌 "कावेरी जेट इंजन" क्या है..??
👉 कावेरी को बैंगलोर में डीआरडीओ की गैस टर्बाइन रिसर्च इस्टेब्लिशमेंट (GTRE) द्वारा डिजाइन किया गया था. SAFRAN जो राफेल को शक्ति देने वाले M88 इंजन बनाता है, को उड़ान भरने योग्य बनाएगा जबकि DASSAULT इसे विमान में एकीकृत करेगा.
📌 भारत और फ्रांस सरकार के बीच हुई गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील में फ्रांस की तीनों मुख्य कंपनियां (THALES, DASSAULT, SAFRAN) राफेल जेट के अन्य पार्ट्स के लिए भारत में अपने सहयोगी पार्टनर्स चुनने को स्वतंत्र है..
📌 इसी के अन्तर्गत इन तीनों मुख्य कंपनियों ने राफेल जेट के अन्य पुर्जे बनाने के लिए भारत में, भारत की कई कंपनियों को अपना पार्टनर बनाया है, "रिलायंस" के अलावा डसॉल्ट की लगभग 100 कंपनियों से बातचीत चल रही है जिसमें से उसने 30 कंपनियों को ऑफसेट पार्टनर के रूप में चुना है. ये सभी सहयोगी कंपनियां राफेल के विभिन्न छोटे, बड़े पार्ट्स बनाएंगी.
📌 डसॉल्ट के सीईओ "एरिक ट्रैपियर" ने साफ किया है कि रिलायंस के साथ डसॉल्ट का संयुक्त उद्यम (ज्वाइंट वेंचर) "DRAL" के "ऑफसेट ऑब्लिगेशन" में रिलायंस की सिर्फ 10% की ही हिस्सेदारी है.
📌 रिलायंस को कुल ऑफसेट धनराशि का 10% ही मिल रहा है. मतलब रिलायंस का जॉइंट वेंचर केवल Dassault के साथ हे तो उसे केवल 8400 करोड़ रूपये के 10 परसेंट का, यानि 840 करोड़ रुपए का ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट मिला है ।
अन्य दोनों फ़्रांसिसी कंपनिया भारत की 100 से ज्यादा कॉम्पिनियो से कार्य करेंगी, जैसे L&T Grasim, इत्यादि ।
🙌 राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप आधारहीन होने के साथ साथ तथ्यहीन भी है, जिसका कोई सर पैर नहीं है. राहुल गांधी देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे है, मोदी सरकार को घोटालेबाज सरकार और मोदी को बेईमान नेता साबित कर के किसी तरह ये सत्ता में वापस आना ही एकमात्र विपक्ष+ठगबंधन का लक्ष्य है. पूरा विपक्ष सिर्फ मोदी को हटाना चाहता है, इनके नेताओ के मुंह से सिर्फ और सिर्फ एक ही शब्द सुनने को मिलता है, मोदी हटाओ, मोदी हटाओ...
*चोर बोले जोर से* मगर कबतक ?
इससे यह साबित होता है कि ये सब नेता 60 वर्षो से आज तक देश की जनता को लूटते आ रहे थे, उसके बीच में मोदी जी आ गए है, अब ये सारे घोटालेबाज/भ्रष्ट/मक्कर/धूर्त नेता एक तरफ, बीच में नरेंद्र मोदी और दूसरी तरफ देश की सवा सौ करोड़ जनता...

Tuesday, 1 January 2019

नव वर्ष 2019 व 2076

नमस्कार दोस्तों,
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये

नव वर्ष 2019 शुरू हुआ, बहुत सी शुभकामनाये मिली, आज इनबॉक्स खोला तो 800 से अधिक व्यक्तियों ने  संदेश भेजे थे, संघ का कार्यकर्ता होने के कारण कई हिंदूवादी कार्यकर्ताओ से मेरा सम्पर्क है इन सब के भी बहुत से संदेश आये थे, परन्तु बहुत से संदेश नकारात्मक थे उनमे कहा गया था की यह हमारा नव वर्ष नहीं हमारा नव वर्ष तो वर्ष प्रतिपदा से शुरू होगा व बहुत से तथ्यों के साथ बताया हुआ था की यह नव वर्ष शराबियो का है जबकि हमारा नव वर्ष मंदिरो से शुरू होता है ।

मै इस बात को सही मानता हु की यह नव वर्ष शराबियो का है  व हिन्दू नव वर्ष एक दम स्टिक है क्योकि हिन्दू नव वर्ष के साथ ही ऋतू परिवर्तन होता है प्रकृति में बदलाव आता है, किसानो की फसल तैयार हो जाती है प्रकृति में चुस्ती आ जाती है परन्तु  इस समय हमारे कैलेंडर को वैश्विक मान्यता प्राप्त नहीं है, गलती इस समय विश्व की नहीं हमारी है, हमारे पास अब दो रास्ते है एक यह की जो कैलेंडर वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है उसी को मानकर हम आगे बढ़े व सकारात्मक संदेश भेजे । दूसरा हम अपने केलिन्डर को अपना ना बोलकर विश्व का बोले तथा उसे वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलवाये। नकारत्मक संदेश फैलाना इसका हल नहीं है । यदि हमे हल निकलना है तो हमे अपने कैलेंडर को विश्व तक पहुंचना होगा तथ हमरे नव वर्ष पर सकारत्मक संदेश फ़ैलाने होंगे, नकारात्मक संदेश फ़ैलाने से हमारा भी दिमाग चिड़चिड़ा सा होने लगता है तथा  सामने वाले के सामने हमारी नकारात्मक छवि बनती है ।

जय श्री राम