Wednesday, 6 February 2019

महागठबंधन का मुकाबला मोदी से ( क्या सियारो का झुण्ड कर पायेगा शेर का शिकार ?)

वर्ष 2013 यह वह वर्ष था जब देश में मोदी युग की शुरुआत हुयी । उस समय मोदी जी को भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया , फिर एक तूफ़ान आया 2014 में वह तूफान सभी विपक्षी दलों को उड़ा कर ले गया, 2014 का मुख्य मुद्दा भ्रष्टाचार व विकास था । मोदी सरकार में विकास ने एक नयी रफ़्तार पकड़ ली , विकास दौगुनी रफ़्तार से होने लगा , इस सरकार के कुछ प्रमुख नेताओ ने तो विकास के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए, उन नेताओ में पियूष गोयल जी , नितिन गडकरी जी शामिल है। यह वे दो नेता है जिनके विकास की रफ़्तार पर कोई ऊँगली नहीं उठा सकता है ।
अब बात आती है भ्रष्टाचार की । जैसा की सब जानते है भ्रष्टाचार में बड़े बड़े नाम आने पहले से ही तय थे । भारत के बड़े बड़े नेताओ के बड़े बड़े घोटालो को पकड़ा जाने लगा , और धीरे धीरे बाकि के राज्यों को जितने का काम भाजपा के द्वारा किया जाने लगा । जैसे जैसे देश से कांग्रेस का खत्म होनी शुरू हुयी वह समझ गयी की भाजपा को हराया नहीं जा सकता उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद तो कांग्रेस के जितने की उम्मीद खत्म सी हो गयी  और कांग्रेस क्षेत्रीय दल बन कर रह गयी । उधर बड़े बड़े भ्र्ष्टाचारिओ को जेल में डालने की प्रक्रिया शुरू हो गयी । लालू प्रसाद यादव को जेल हो गयी। कई बड़े दलालो को पकड़ कर भारत लाया गया । सालो से देश को लूटने वाले सियारो का शिकार की शुरुआत शुरू हो गयी थी । अब इन सियारो ने इक्क्ठा होना शुरू कर दिया व देश के चौकीदार को ही चौर कहना शुरू कर दिया । हां सच कहा तुम लोगो ने ये चौकीदार चौर ही तो है जिसने अपने पुरे जीवन को चुरा कर देश को दे दिया , जिसने देश के लिए घर त्याग दिया जो साल के 365 दिन देश के लिए काम करता है । जो दिन के 20 घंटे बिना सोये देश को देता है ताकि वह देश को आगे बढ़ा सके , जिसका परिवार आज भी गरीबी में गुजार रहा है । चौर वह होता है जिसने धन लुटा होता है, जिसके पास लुटा हुआ धन होता है अगर चौकीदार चौर है तो उसका लुटा हुआ धन कहा है ? 
अब बात आती है असली चौरो की जिन्होंने देश का धन लूट लूट के अपने बंगले खड़े किये है । इनको सबको पता है की एक सियार कभी शेर का शिकार नहीं कर सकता है । इसीलिए इन सियारो ने अपने एक झुण्ड का निर्माण करना शुरू किया । अगर हमे झुण्ड में चलना होता है तो आवश्यकता होती है एक नेतृत्व की जो की इस झुण्ड के पास है नहीं अभी नेतृत्व के लिए लड़ाई चल रही है मान लो यह झुण्ड किसी तरह जीत जाता है तो इन सबको लूट का हिस्सा चाहिए जिसके लिए ये भूखे सियारो की तरह देश के धन पर टूट पड़ेंगे । अब यह मेरे देश पर निर्भर है की वह अपने वोट सियार के झुण्ड को देता है या एक चौकीदार को ।

जय हिन्द
जय भारत