Tuesday, 3 December 2019

देश की सेवा में तत्पर आरएसएस ।

सांप्रदायिक हिंदूवादी, फ़ासीवादी और इसी तरह के अन्य शब्दों से पुकारे जाने वाले संगठन के तौर पर आलोचना सहते और सुनते हुए भी संघ को कम से कम 7-8 दशक हो चुके हैं.
दुनिया में शायद ही किसी संगठन की इतनी आलोचना की गई होगी. वह भी बिना किसी आधार के.
संघ के ख़िलाफ़ लगा हर आरोप आख़िर में पूरी तरह कपोल-कल्पना और झूठ साबित हुआ है.
कोई शक नहीं कि आज भी कई लोग संघ को इसी नेहरूवादी दृष्टि से देखते हैं.
हालांकि ख़ुद नेहरू को जीते-जी अपना दृष्टि-दोष ठीक करने का एक दुखद अवसर तब मिल गया था, जब 1962 में देश पर चीन का आक्रमण हुआ था.
तब देश के बाहर पंचशील और लोकतंत्र वग़ैरह आदर्शों के मसीहा जवाहरलाल न ख़ुद को संभाल पा रहे थे, न देश की सीमाओं को. लेकिन संघ अपना काम कर रहा था.
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संघ के कुछ उल्लेखनीय कार्य


1959 में जनरल करिअप्पा मंगलोर की संघ शाखा के कार्यक्रम में गए थेइमेज कॉपीरइटFACEBOOK@RSSORG
Image caption1959 में जनरल करिअप्पा मंगलोर की संघ शाखा के कार्यक्रम में गए थे

1) कश्मीर सीमा पर निगरानी, विभाजन पीड़ितों को आश्रय

संघ के स्वयंसेवकों ने अक्टूबर 1947 से ही कश्मीर सीमा पर पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों पर बगैर किसी प्रशिक्षण के लगातार नज़र रखी.
ये काम न नेहरू-माउंटबेटन सरकार कर रही थी, न हरिसिंह सरकार.
उसी समय, जब पाकिस्तानी सेना की टुकड़ियों ने कश्मीर की सीमा लांघने की कोशिश की, तो सैनिकों के साथ कई स्वयंसेवकों ने भी अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए लड़ाई में प्राण दिए थे.
विभाजन के दंगे भड़कने पर, जब नेहरू सरकार पूरी तरह हैरान-परेशान थी, संघ ने पाकिस्तान से जान बचाकर आए शरणार्थियों के लिए 3000 से ज़्यादा राहत शिविर लगाए थे.

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गुरु जीइमेज कॉपीरइटFACEBOOK@RSSORG
Image captionगुरु जी गोलवलकर

2) 1962 का युद्ध

सेना की मदद के लिए देश भर से संघ के स्वयंसेवक जिस उत्साह से सीमा पर पहुंचे, उसे पूरे देश ने देखा और सराहा.
स्वयंसेवकों ने सरकारी कार्यों में और विशेष रूप से जवानों की मदद में पूरी ताकत लगा दी - सैनिक आवाजाही मार्गों की चौकसी, प्रशासन की मदद, रसद और आपूर्ति में मदद, और यहां तक कि शहीदों के परिवारों की भी चिंता.
जवाहर लाल नेहरू को 1963 में 26 जनवरी की परेड में संघ को शामिल होने का निमंत्रण देना पड़ा.
परेड करने वालों को आज भी महीनों तैयारी करनी होती है, लेकिन मात्र दो दिन पहले मिले निमंत्रण पर 3500 स्वयंसेवक गणवेश में उपस्थित हो गए.
निमंत्रण दिए जाने की आलोचना होने पर नेहरू ने कहा, "यह दर्शाने के लिए कि केवल लाठी के बल पर भी सफलतापूर्वक बम और चीनी सशस्त्र बलों से लड़ा सकता है, विशेष रूप से 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने के लिए आरएसएस को आकस्मिक आमंत्रित किया |




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3) कश्मीर का विलय

कश्मीर के महाराजा हरि सिंह विलय का फ़ैसला नहीं कर पा रहे थे और उधर कबाइलियों के भेस में पाकिस्तानी सेना सीमा में घुसती जा रही थी तब नेहरू सरकार तो - हम क्या करें वाली मुद्रा में - मुंह बिचकाए बैठी थी. सरदार पटेल ने गुरु गोलवलकर से मदद मांगी.
गुरुजी श्रीनगर पहुंचे, महाराजा से मिले. इसके बाद महाराजा ने कश्मीर के भारत में विलय पत्र का प्रस्ताव दिल्ली भेज दिया.
क्या बाद में महाराजा हरिसिंह के प्रति देखी गई नेहरू की नफ़रत की एक जड़ यहां थी?


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4) 1965 के युद्ध में क़ानून-व्यवस्था संभाली

पाकिस्तान से युद्ध के समय लालबहादुर शास्त्री को भी संघ याद आया था.
शास्त्री जी ने क़ानून-व्यवस्था की स्थिति संभालने में मदद देने और दिल्ली का यातायात नियंत्रण अपने हाथ में लेने का आग्रह किया, ताकि इन कार्यों से मुक्त किए गए पुलिसकर्मियों को सेना की मदद में लगाया जा सके.
घायल जवानों के लिए सबसे पहले रक्तदान करने वाले भी संघ के स्वयंसेवक थे. युद्ध के दौरान कश्मीर की हवाईपट्टियों से बर्फ़ हटाने का काम संघ के स्वयंसेवकों ने किया था.


वीर सावरकरइमेज कॉपीरइटFACEBOOK@RSSORG
Image captionवीर सावरकर

5) गोवा का विलय

दादरा, नगर हवेली और गोवा के भारत विलय में संघ की निर्णायक भूमिका थी. 21 जुलाई 1954 को दादरा को पुर्तगालियों से मुक्त कराया गया, 28 जुलाई को नरोली और फिपारिया मुक्त कराए गए और फिर राजधानी सिलवासा मुक्त कराई गई.
संघ के स्वयंसेवकों ने 2 अगस्त 1954 की सुबह पुतर्गाल का झंडा उतारकर भारत का तिरंगा फहराया, पूरा दादरा नगर हवेली पुर्तगालियों के कब्जे से मुक्त करा कर भारत सरकार को सौंप दिया.
संघ के स्वयंसेवक 1955 से गोवा मुक्ति संग्राम में प्रभावी रूप से शामिल हो चुके थे.
गोवा में सशस्त्र हस्तक्षेप करने से नेहरू के इनकार करने पर जगन्नाथ राव जोशी के नेतृत्व में संघ के कार्यकर्ताओं ने गोवा पहुंच कर आंदोलन शुरू किया, जिसका परिणाम जगन्नाथ राव जोशी सहित संघ के कार्यकर्ताओं को दस वर्ष की सजा सुनाए जाने में निकला.
हालत बिगड़ने पर अंततः भारत को सैनिक हस्तक्षेप करना पड़ा और 1961 में गोवा आज़ाद हुआ.


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6) आपातकाल

1975 से 1977 के बीच आपातकाल के ख़िलाफ़ संघर्ष और जनता पार्टी के गठन तक में संघ की भूमिका की याद अब भी कई लोगों के लिए ताज़ा है.
सत्याग्रह में हजारों स्वयंसेवकों की गिरफ्तारी के बाद संघ के कार्यकर्ताओं ने भूमिगत रह कर आंदोलन चलाना शुरु किया.
आपातकाल के खिलाफ पोस्टर सड़कों पर चिपकाना, जनता को सूचनाएं देना और जेलों में बंद विभिन्न राजनीतिक कार्यकर्ताओं -नेताओं के बीच संवाद सूत्र का काम संघ कार्यकर्ताओं ने संभाला.
जब लगभग सारे ही नेता जेलों में बंद थे, तब सारे दलों का विलय करा कर जनता पार्टी का गठन करवाने की कोशिशें संघ की ही मदद से चल सकी थीं.


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Image captionदीनदयाल उपाध्याय

7) भारतीय मज़दूर संघ

1955 में बना भारतीय मज़दूर संघ शायद विश्व का पहला ऐसा मज़दूर आंदोलन था, जो विध्वंस के बजाए निर्माण की धारणा पर चलता था.
कारखानों में विश्वकर्मा जयंती का चलन भारतीय मज़दूर संघ ने ही शुरू किया था.
आज यह विश्व का सबसे बड़ा, शांतिपूर्ण और रचनात्मक मज़दूर संगठन है.


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8) ज़मींदारी प्रथा का ख़ात्मा

जहां बड़ी संख्या में ज़मींदार थे उस राजस्थान में ख़ुद सीपीएम को यह कहना पड़ा था कि भैरों सिंह शेखावत राजस्थान में प्रगतिशील शक्तियों के नेता हैं.
संघ के स्वयंसेवक शेखावत बाद में भारत के उपराष्ट्रपति भी बने.


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9.) शिक्षा के क्षेत्र में संघ

भारतीय विद्यार्थी परिषद, शिक्षा भारती, एकल विद्यालय, स्वदेशी जागरण मंच, विद्या भारती, वनवासी कल्याण आश्रम, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की स्थापना.
विद्या भारती आज 20 हजार से ज्यादा स्कूल चलाता है, लगभग दो दर्जन शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज, डेढ़ दर्जन कॉलेज, 10 से ज्यादा रोजगार एवं प्रशिक्षण संस्थाएं चलाता है.
केन्द्र और राज्य सरकारों से मान्यता प्राप्त इन सरस्वती शिशु मंदिरों में लगभग 30 लाख छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और 1 लाख से अधिक शिक्षक पढ़ाते हैं.
संख्या बल से भी बड़ी बात है कि ये संस्थाएं भारतीय संस्कारों को शिक्षा के साथ जोड़े रखती हैं.
अकेला सेवा भारती देश भर के दूरदराज़ के और दुर्गम इलाक़ों में सेवा के एक लाख से ज़्यादा काम कर रहा है.
लगभग 35 हज़ार एकल विद्यालयों में 10 लाख से ज़्यादा छात्र अपना जीवन संवार रहे हैं.
उदाहरण के तौर पर सेवा भारती ने जम्मू कश्मीर से आतंकवाद से अनाथ हुए 57 बच्चों को गोद लिया है जिनमें 38 मुस्लिम और 19 हिंदू बच्चे हैं.


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10) सेवा कार्य

1971 में ओडिशा में आए भयंकर चंक्रवात से लेकर भोपाल की गैस त्रासदी तक, 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों से लेकर गुजरात के भूकंप, सुनामी की प्रलय, उत्तराखंड की बाढ़ और कारगिल युद्ध के घायलों की सेवा तक - संघ ने राहत और बचाव का काम हमेशा सबसे आगे होकर किया है.
भारत में ही नहीं, नेपाल, श्रीलंका और सुमात्रा तक में.

Wednesday, 2 October 2019

शास्त्री जी को भूलता देश

आज सुबह उठकर मै सैर के लिए निकला , रास्तें में एक बच्चा भागा भागा मेरे पास आया और मुझे बोला "आज गाँधी जी का जन्मदिन है।"  मैंने मुस्करा  कर बोला "अच्छा ! आपको किसने बताया ? "  उस बच्चे ने ख़ुशी से मुस्करा कर कहा " मेरी अध्यापक ने " मैंने अगला प्रश्न पूछा कि "और क्या बताया आपको ?" बच्चे ने कहा "और तो कुछ नहीं" मै थोड़ा सोचते हुए बच्चे को बताया " क्या आपको पता है आज शास्त्री जी का भी जन्मदिवस है " बच्चा उलझन में पड़ गया क्योकि उसे मालूम नहीं था शास्त्री जी कौन है, मेरे मन में सवाल जागा आखिर आज के समय बच्चो को यह क्यों नहीं बताया जाता शास्त्री जी कौन थे, उन्होंने देश के लिए क्या किया था ? फिर मेरे मन में एक और सवाल जागा क्या बच्चो कि तरह बाकिओ को भी नहीं पता क्या कि शास्त्री जी कौन थे ? मै घर आया व घर में मेरी छोटी बहन से पूछा " क्या आपको पता है शास्त्री जी कौन थे " उन्होंने मजाक के लहजे में जवाब दिया " पड़ोस वाले पंडित जी "  आगे मैंने अपने २-३ मित्रो से पूछा "शास्त्री जी कौन थे?" मुझे हैरानी इस बात पर थी आखिर क्यों किसी को नहीं पता कि शास्त्री जी कौन थे।


हम सभी लाल बहादुर शास्त्री जी जैसे महान नेता को भूलते जा रहे है जिन्होंने देश के लिए अपना पूर्ण जीवन कुर्बान कर दिया । वह शास्त्री जी जिन्होंने "जय जवान जय किसान" का नारा दिया,वह शास्त्री जी जो हमारे देश के प्रधानमंत्री थे,वह शास्त्री जी जिन्होंने हमे आजादी दिलाने  में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया, वह शास्त्री जी जिन्होंने पाकिस्तान को उसकी औकात बता दी थी , वह शास्त्री जी  जिनके कार्यकाल में हमारी सेना को पहली बार मजबूती प्राप्त हुयी , जिन्होंने देश के किसानो व सेना के लिए अपना पूरा जीवन कुर्बान कर दिया ।


आज मेरा आप सभी से आग्रह है थोड़ा समय निकल कर लाल बहादुर शास्त्री जी के बारे में पढ़े व अपने मित्रो के साथ कुछ समय शास्त्री जी के विषय में चर्चा करे  ताकि यह देश जान सके शास्त्री जी कौन थे ।  

Tuesday, 4 June 2019

नक्सलवाद की जड़ कम्युनिस्ट

आजादी के इतने वर्षो बाद भी आज भी बहुत से स्थानों पर नक्सलवाद काबिज है रोजाना नक्सलियों द्वारा हत्याएं की खबरे सुनने में आती है, आखिर नक्सलवाद इतना मजबूत कैसे हुआ ?

कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों के उस आंदोलन का अनौपचारिक नाम है जो भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ। नक्सल शब्द की उत्पत्ति पश्चिम बंगाल के छोटे से गाँव नक्सलबाड़ी से हुई है जहाँ भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता चारू मजूमदार और कानू सान्याल ने 1967 मे सत्ता के खिलाफ़ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की। मजूमदार चीन के कम्यूनिस्ट नेता माओत्से तुंग के बहुत बड़े प्रशंसकों में से थे और उनका मानना था कि भारतीय मज़दूरों और किसानों की दुर्दशा के लिये सरकारी नीतियाँ जिम्मेदार हैं जिसकी वजह से उच्च वर्गों का शासन तंत्र और फलस्वरुप कृषितंत्र पर वर्चस्व स्थापित हो गया है। इस न्यायहीन दमनकारी वर्चस्व को केवल सशस्त्र क्रांति से ही समाप्त किया जा सकता है। 1967 में "नक्सलवादियों" ने कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों की एक अखिल भारतीय समन्वय समिति बनाई। इन विद्रोहियों ने औपचारिक तौर पर स्वयं को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से अलग कर लिया और सरकार के खिलाफ़ भूमिगत होकर सशस्त्र लड़ाई छेड़ दी। 1971 के आंतरिक विद्रोह (जिसके अगुआ सत्यनारायण सिंह थे) और मजूमदार की मृत्यु के बाद यह आंदोलन एकाधिक शाखाओं में विभक्त होकर कदाचित अपने लक्ष्य और विचारधारा से विचलित हो गया।



आज कई नक्सली संगठन वैधानिक रूप से स्वीकृत राजनीतिक पार्टी बन गये हैं और संसदीय चुनावों में भाग भी लेते है। लेकिन बहुत से संगठन अब भी छद्म लड़ाई में लगे हुए हैं। नक्सलवाद के विचारधारात्मक विचलन की सबसे बड़ी मार आँध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, उड़ीसा, झारखंड और बिहार को झेलनी पड़ रही है।

भारत में नक्सलवाद की बड़ी घटनाएं
2007 छत्तीसगढ़ के बस्तर में 300 से ज्यादा विद्रोहियों ने 55 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट पर ‌उतार दिया था।
2008 ओडिसा के नयागढ़ में नक्सलवाद‌ियों ने 14 पुलिसकर्मियों और एक नागरिक की हत्या कर दी।
2009 महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में हुए एक बड़े नक्सली हमले में 15 सीआरपीएफ जवानों की मौत हो गयी।
2010 नक्सलवादियों ने कोलकाता-मुंबई ट्रेन में 150 यात्रियों की हत्या कर दी।
2010 पश्चिम बंगाल के सिल्दा केंप में घुसकर नक्सलियों ने 24 अर्द्धसैनिक बलों को मार गिराया।
2011 छत्तीसगढ के दंतेवाड़ा में हुए एक बड़े नक्सलवादी हमले में कुल 76 जवानों की हत्या कर दी जिसमें सीआरपीएफ के जवान समेत पुल‌िसकर्मी भी शामिल थे।
2012 झारखंड के गढ़वा जिले के पास बरिगंवा जंगल में 13 पुलिसकर्मीयों को मार गिराया।
2013 छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने कांग्रेस के नेता समेत 27 व्यक्तियों को मार गिराया।




नक्सलियों के विरुद्ध चलाएं गए प्रमुख अभियान
स्टीपेलचेस अभियान
यह अभियान वर्ष 1971 में चलाया गया। इस अभियान में भारतीय सेना तथा राज्य पुलिस ने भाग लिया था। अभियान के दौरान लगभग 20,000 नक्सली मारे गए थे।

ग्रीनहंट अभियान
यह अभियान वर्ष 2009 में चलाया गया। नक्सल विरोधी अभियान को यह नाम मीडिया द्वारा प्रदान किया गया था। इस अभियान में पैरामिलेट्री बल तथा राष्ट्र पुलिस ने भाग लिया। यह अभियान छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश तथा महाराष्ट्र में चलाया गया।

प्रहार
3 जून, 2017 को छत्तीसगढ़ राज्य के सुगमा जिले में सुरक्षा बलों द्वारा अब तक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान ‘प्रहार’ को प्रारंभ किया गया। सुरक्षा बलों द्वारा नक्सलियों के चिंतागुफा में छिपे होने की सूचना मिलने के पश्चात इस अभियान को चलाया गया था। इस अभियान में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कोबरा कमांडो, छत्तीसगढ़ पुलिस, डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड तथा इंडियन एयरफोर्स के एंटी नक्सल टास्क फोर्स ने भाग लिया। यह अभियान चिंतागुफा पुलिस स्टेशन के क्षेत्र के अंदर स्थित चिंतागुफा जंगल में चलाया गया जिसे नक्सलियों का गढ़ माना जाता है। इस अभियान में 3 जवान शहीद हो गए तथा कई अन्य घायल हुए। अभियान के दौरान 15 से 20 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना सुरक्षा बल के अधिकारी द्वारा दी गई। खराब मौसम के कारण 25 जून, 2017 को इस अभियान को समाप्त किया गया।


Pic credit :India Facts
अर्बन नक्सल
नक्सलवाद से तो भारत की सेना व पुलिस लड़ रही है परन्तु ये जो अर्बन नक्सल के रूप में हमारे बिच में घूम रहे है इनका इलाज आखिर कोन करे। अर्बन नक्सल उन पत्रकारों, चिन्तनकारो, विश्लेषकों का गिरहो है जो समाज में भ्रम की स्तिथि उतपन्न कर रहा है , ये नारीवाद के नाम पर स्त्रियो में बगावत करवा रहे है , उदारवाद के नाम पर आतंकवाद से सहानुभूति रखते है, हक़ के नाम पर देश के टुकड़े करने के प्रोपेगेंडा चलते है। इन सबका एक ही इलाज है इनको हमे अपने सामाज से निकल बहार फेकना होगा यानि इनको हमे तवज्जो देने की जरूरत नहीं है । 

Saturday, 18 May 2019

बॉलीवुड व लव जिहाद :- यह रिश्ता क्या कहलाता है ?

पहले माना जाता था कि फिल्मे समाज का आइना होती है, परन्तु इस आईने को तोड़ने का काम खुद बॉलीवुड कर रहा है, रोजाना एक फिल्म रिलीज हो रही है जिसमे लव जिहाद कि सच्चाई बताने कि जगह उसे प्रमोट किया जा रहा है क्या यह एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है। पिछले कुछ दिनों में कई फिल्मो में लव जिहाद को प्रमुखता से बढ़ावा दिया गया चाहे वो फिल्म फोटोग्राफ हो, या फिर कलंक या वो केदारनाथ हो। केदारनाथ मूवी में तो हद पार कर दी गयी जिसमे सीधे सीधे हिन्दू सभ्यता व संस्कृति पर चोट पहुंचाई।


आखिर क्यों इन फिल्मो में लड़का  ही मुस्लिम होता है और लड़की हिन्दू ? आखिर क्यों इन फिल्मो में हिन्दू लड़की को माँ बाप को धोखा  देना सिखाया जाता है? आखिर क्यों इन फिल्मो में हिन्दू लड़की को गद्दारी करनी सिखाई जाती है? अगर प्यार पर फिल्म बनानी है तो माँ बाप कि सहमति भी दिखा सकते है। अगर दो धर्मो के  प्यार पर ही फिल्म बनानी है तो किसी फिल्म में लड़का हिन्दू व लड़की मुस्लिम दिखने कि हिम्मत इनमे क्यों नहीं है ? बात सिर्फ हिम्मत कि न होकर बॉलीवुड कि मंशा कि भी है बॉलीवुड कि मंशा पर सवाल उठाना  आवश्यक  है क्योकि पिछले दिनों रिलीज़ हुयी फिल्म फोटोग्राफ फ्लॉप साबित हुयी तो इस फिल्म को लीक कर दिया गया यह कोई आम लीक नहीं थी फिल्म फुल HD में लीक हुयी इसका साफ़ सा मतलब है कि फिल्म निर्माताओं ने जानबूझकर लीक करवाई। यदि निर्माता को पैसे कमाने में रूचि नहीं है तो वह फिल्म क्यों बना रहा है ? यह सवाल उठना लाजमी है । और यह कब तक चलता रहेगा ? सरकार रोक लगाए तो इनकी अभिव्यक्ति कि आजादी खतरे में आ जाती है, जनता सवाल उठाये तो हिन्दू जनता गुंडे है, कोई संगठन सवाल उठाये तो उसकी सोच छोटी है ? तो अब ये सवाल उठाने कि आजादी किसको है ? क्या मेरे इस सवाल का जवाब है किसी के पास ?, ताज्जुब तो इस बात पर होता है देश का चौथा खम्बा कहे जाने वाला मिडिया लव जिहाद कि सच्चाई क्यों नहीं दिखता ? क्या यह लुटियंस मिडिया कि सोची समझी राजनीति है ? यह सब सवाल मेरे नहीं पुरे समाज के है जिसे इस सिस्टम ने गुलाम बनाया हुआ है , लव जिहाद एक सच्चाई है जिसे कोई नकार नहीं सकता इस सच्चाई के लिंक भी मै निचे डाल दूंगा। अब फैसला मेरे ब्लॉग पढ़ने वाले के हाथो में है वे कब आवाज उठाएंगे ।



links of Love Jihad
धर्म छिपाकर शादी करने तथा इच्छा के विरुद्ध जबरन संबंध बनाने के मामले में पुलिस
लव जिहाद का चौंकाने वाला मामला: अश्लील फोटो खींचकर बर्बाद करनी चाही जिंदगी, गोमांस खाने और नमाज पढ़ने का भी बनाया दबाव

Monday, 8 April 2019

सम्मान की आय या मुफ्त के 72000 रुपये (फैसला आपका)

चुनावी मौसम आते ही चुनावी घोषणाएं शुरू हो गयी , कांग्रेस ने अपना इक्का चलते हुए न्याय स्कीम की घोषणा कर दी तो भाजपा ने स्किल डेवलमेंट , स्टार्ट अप इंडिया  व अन्य योजनाओं द्वारा युवाओ को खुद आय अर्जित करने के लिए प्रेरित करेगी । आइये की योजनाओं को विस्तार से समझते है

न्याय
इस स्कीम के अनुसार कांग्रेस देश के 25 करोड़ लोगों को 72000 रुपये सालाना मुफ्त में बांटेगी। मेरे अनुसार यह स्कीम अर्थशास्त्र के अनुसार न हो कर लोक लुभावनी है जिस से देश को बहुत बड़े नुकसान हो सकते है भारत की अर्थव्यवस्था वेनेजुएला की तरह तबाह हो सकती है , क्योकि अगर 72000 बाटने है तो साफ सी बात है कांग्रेस अपनी जेब से तो देगी नही , वह माध्यम वर्ग से टैक्स के रूप में वसूलेगी , जिस से माध्यम वर्ग की क्रय क्षमता कम होगी, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होने बन्द हो जाएंगे , और धीरे धीरे मध्यम वर्ग समाप्त होना शुरू हो जाएगा, लोगो में  काम करने की इच्छा खत्म होनी शुरू हो जाएगी ।

सम्मान की आय 

हम अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेश से आयात करते है , सवाल यह है कि हम आने यहाँ क्यो नही बना सकते , जवाब है कि हमारे पास इंफ्रास्ट्रक्चर व कुशल व्यक्तिओ की कमी है , अगर हम यह सब कर दे तो देश मे रोजगार स्वत: ही पैदा होने शुरू हो जाएंगे इसीलिए हम स्किल इंडिया , स्टार्ट अप इंडिया व मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं की आवश्यकता है जिन पर तेजी से काम चल रहा है व भाजपा ने वादा किया है कि वह इसमे बाद निवेश करेगी , इसीलिए मैं मानता हूं कि भाजपा की योजनाएं अर्थशास्त्र के अनुकूल है। 

Saturday, 23 March 2019

हिन्दू विरोधी विपक्ष ( साम्प्रदायिकता की राजनीति )


आज कल राजनीति में एक ट्रेंड चल गया है , विपक्ष मानता है की अगर वह हिन्दुओ को गलत साबित कर देंगे तो सरकार को बुरा साबित कर देंगे इसीलिए विपक्ष के नेता सरकार को बुरा बोलते बोलते आजकल हिन्दुओ को ही गालिया देने में उतर  आये है, यह वही लोग है जो कहते है आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता परन्तु एक छोटी सी मुठभेड़ का धर्म इन्होने ढूंढ निकला है घटना परसो यानि होली वाले दिन की है , यह एक आम झड़प थी जो अक्सर गली पड़ोस में होती रहती है पुलिस इस पर कार्यवाही भी करती है । मै भिवानी का निवासी हु परसो यहाँ  एक गुंडा भी पकड़ा गया जो बड़े पदों पर रह चूका है। परन्तु मैन स्ट्रीम मीडिया में इसका कोई असर नहीं दिखा क्योकि इस खबर में उनको कोई मसाला नहीं मिला इस खबर में उनको हिन्दुओ को बुरा साबित करने का अवसर नहीं मिला ।
परन्तु गुरुग्राम में हुयी घटना अचानक मैन स्ट्रीम में इसीलिए आ गयी क्योकि उसमे इन्हे हिन्दू मुस्लिम दिखा, और हमेशा की तरह विपक्ष को एक बहाना मिल गया हिन्दू मुस्लिम में दरार पैदा करने का और पेश है अरविन्द केजरीवाल जी का ट्वीट

उसके बाद अखिलेश यादव जी का ट्वीट
AKHILESH YADAV ON TWITTER


चलो इन दोनों के ट्वीट से एक बात तो साबित हो गए की हिन्दुओ की एक ही पार्टी ही "भाजपा"

अगर आप विपक्ष के सांप्रदायिक होने से सहमत नहीं है तो मै आपसे सिर्फ 3 सवाल पूछना चाहूंगा जिस से आप मेरी बात से सहमत हो जायेंगे ।
१। दिल्ली में दिन दहाड़े रोड के बीच गोलिया चलती है उस पर केजरीवाल जी कुछ क्यों नहीं बोले?
२। केजरीवाल जी को आतंकवाद का धर्म नहीं दीखता परन्तु गुंडों को धर्म कैसे दिख जाता है ?
३। अगर सवाल सिर्फ प्रशासन पर उठाना था तो ट्वीट में इतनी बार हिन्दू शब्द का इस्तेमाल क्यों किया ?

इनका मुख्य मकसद सिर्फ हिन्दू धर्म पर सवाल उठा कर सरकार को घेरने को होता है , क्योकि इनको लगता है की यह सरकार हिन्दुओ की सरकार है । वह यह भूल गए की अगर अल्पसंख्यको  के लिए सबसे अधिक काम हुआ है तो इसी सरकार में हुआ है जिसमे तीन तलाक बिल शामिल है ।

ऊपर सभी बातो का एक ही निष्कर्ष यह विपक्ष साम्प्रदायिक राजनीति करके देश के माहौल को खराब करना चाहता है ।

Wednesday, 6 February 2019

महागठबंधन का मुकाबला मोदी से ( क्या सियारो का झुण्ड कर पायेगा शेर का शिकार ?)

वर्ष 2013 यह वह वर्ष था जब देश में मोदी युग की शुरुआत हुयी । उस समय मोदी जी को भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया , फिर एक तूफ़ान आया 2014 में वह तूफान सभी विपक्षी दलों को उड़ा कर ले गया, 2014 का मुख्य मुद्दा भ्रष्टाचार व विकास था । मोदी सरकार में विकास ने एक नयी रफ़्तार पकड़ ली , विकास दौगुनी रफ़्तार से होने लगा , इस सरकार के कुछ प्रमुख नेताओ ने तो विकास के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए, उन नेताओ में पियूष गोयल जी , नितिन गडकरी जी शामिल है। यह वे दो नेता है जिनके विकास की रफ़्तार पर कोई ऊँगली नहीं उठा सकता है ।
अब बात आती है भ्रष्टाचार की । जैसा की सब जानते है भ्रष्टाचार में बड़े बड़े नाम आने पहले से ही तय थे । भारत के बड़े बड़े नेताओ के बड़े बड़े घोटालो को पकड़ा जाने लगा , और धीरे धीरे बाकि के राज्यों को जितने का काम भाजपा के द्वारा किया जाने लगा । जैसे जैसे देश से कांग्रेस का खत्म होनी शुरू हुयी वह समझ गयी की भाजपा को हराया नहीं जा सकता उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद तो कांग्रेस के जितने की उम्मीद खत्म सी हो गयी  और कांग्रेस क्षेत्रीय दल बन कर रह गयी । उधर बड़े बड़े भ्र्ष्टाचारिओ को जेल में डालने की प्रक्रिया शुरू हो गयी । लालू प्रसाद यादव को जेल हो गयी। कई बड़े दलालो को पकड़ कर भारत लाया गया । सालो से देश को लूटने वाले सियारो का शिकार की शुरुआत शुरू हो गयी थी । अब इन सियारो ने इक्क्ठा होना शुरू कर दिया व देश के चौकीदार को ही चौर कहना शुरू कर दिया । हां सच कहा तुम लोगो ने ये चौकीदार चौर ही तो है जिसने अपने पुरे जीवन को चुरा कर देश को दे दिया , जिसने देश के लिए घर त्याग दिया जो साल के 365 दिन देश के लिए काम करता है । जो दिन के 20 घंटे बिना सोये देश को देता है ताकि वह देश को आगे बढ़ा सके , जिसका परिवार आज भी गरीबी में गुजार रहा है । चौर वह होता है जिसने धन लुटा होता है, जिसके पास लुटा हुआ धन होता है अगर चौकीदार चौर है तो उसका लुटा हुआ धन कहा है ? 
अब बात आती है असली चौरो की जिन्होंने देश का धन लूट लूट के अपने बंगले खड़े किये है । इनको सबको पता है की एक सियार कभी शेर का शिकार नहीं कर सकता है । इसीलिए इन सियारो ने अपने एक झुण्ड का निर्माण करना शुरू किया । अगर हमे झुण्ड में चलना होता है तो आवश्यकता होती है एक नेतृत्व की जो की इस झुण्ड के पास है नहीं अभी नेतृत्व के लिए लड़ाई चल रही है मान लो यह झुण्ड किसी तरह जीत जाता है तो इन सबको लूट का हिस्सा चाहिए जिसके लिए ये भूखे सियारो की तरह देश के धन पर टूट पड़ेंगे । अब यह मेरे देश पर निर्भर है की वह अपने वोट सियार के झुण्ड को देता है या एक चौकीदार को ।

जय हिन्द
जय भारत

Monday, 14 January 2019

महाकुम्भ के साथ भारतीय रेलवे

महाकुम्भ मेला , इसका भारतीय संस्कृति में बहुत बड़ा महत्व है , परन्तु पिछले कुछ कुम्भ के मेले में यह कुछ घटनाओ के कारण कुम्भ मेले पर कुछ धब्बे लगने लगे थे , धक्का मुक्की होना आम बात हो गयी थी कुम्भ के मेले को लोगो को बिछड़ने का स्थान बताया जाने लगा था। इस बार के कुम्भ मेले को ऐतिहासिक बनाने की योजना भाजपा सरकार द्वारा बनाई गयी व किसी कड़ी में पियूष गोयल जी की रेलवे ने इस कुम्भ के मेले को चार चाँद लगा दिए। आइये जानते है कैसे :-
१. प्रयागराज कुम्भ में रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं के लिए फर्स्ट एड, शौचालय, मोबाइल चार्जिंग, LED लाइट्स, CCTV कैमरा व LED स्क्रीन की सुविधाओं वाले वेटिंग रूम बनाये गए हैं ताकि कुम्भ में आने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा का एक सुखद एहसास लेकर जाएं विस्तार में जानने के लिए यहाँ क्लिक करे 

२.महाकुम्भ के लिए प्रयागराज  रेलवे स्टेशन को स्वच्छ और हाइजेनिक बनाया जा रहा है, श्रद्धालु इस कुम्भ से आस्था, श्रद्धा के साथ ही स्वच्छता और सेवा की एक बेहतरीन याद लेकर जाने वाले हैं https://twitter.com/PiyushGoyalOffc/status/1084416628782235649

३. महाकुंभ में आने वाले यात्रियों को टिकट संबंधी कोई परेशानी ना हो, इसके लिये रेलवेकर्मी हैंड हेल्ड मशीन द्वारा मेला क्षेत्र में ही टिकट बांटेंगे, ताकि श्रद्धालुओं को स्टेशन पर टिकट लेने की आवश्यकता ना पड़े विस्तार में जानने के लिए यहाँ क्लिक करे 

४. कुंभ के लिए पूरे देश से चलेंगी 800 ट्रेनें, सभी को कुंभ थीम से सजाया जाएगा, डिब्बों पर लिखे होंगे खास नारे और मैसेजhttps://www.bhaskar.com/uttar-pradesh/gorakhpur/news/800-trains-to-run-from-all-over-country-for-mahakumbh-in-gorakhpur-up-5999552.html

५. कुम्भ मेले के लिए रेलवे चलाएगा अतिरिक्त ट्रेनें, देशी-विदेशी श्रद्धालुओं के लिए 5 एसी ट्रेन भी चलेंगी, कुम्भ में आने वाले नागरिकों के लिए विशेष टिकट काउंटर बनाये गए हैं, इसके अलावा IRCTC की वेबसाइट अथवा मोबाइल ऐप से भी टिकट लिए जा सकते हैं|
 https://twitter.com/PiyushGoyalOffc/status/1082899515684712449

६. प्रयागराज तक यात्रियों को आसानी से सुरक्षित पहुंचाने के लिए रेलवे ने सुरक्षा भी विशेष ध्यान दे रहा है। श्रद्धालुओं के आने-जाने के साथ ही उनके ठहरने, खाने-पीने और साफ-सफाई के भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं। एनई रेलवे द्वारा रामबाग, दारागंज, झूंसी और प्रयागराज सिटी स्टेशन पर कुंभ यात्रियों के विशेष इंतजाम रहेंगे|

Tuesday, 8 January 2019

राफेल डील का सच WITH FACTS

#राफेल डील में ऑफसेट धनराशि का बंटवारा : संक्षिप्त विवरण
📌 36 राफेल जेट (हथियार+विशेष बदलाव के बाद) की लागत : 59000 करोड़ रुपए.
📌 गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील है, मतलब पैसा भारत सरकार फ्रांस सरकार को देगी.
📌 गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील में समझौते के मुताबिक सौदे का 50% ऑफसेट के रूप में भारत में निवेश करना होगा.
📌 50% ऑफसेट मतलब लगभग 30000 करोड़ रुपए.
📌 राफेल डील में मुख्य रूप से 4 कंपनियां है. जिनमें से 3 फ्रांस की कंपनी है और 1 भारत की कंपनी है.
📌 इन चारों में 50% ऑफसेट धनराशि (30000 करोड़ रुपए) का बंटवारा इस प्रकार हुआ है.. 👇
👉 1. THALES (फ्रांस) : 6300 करोड़ रुपए
👉 2. DASSAULT (फ्रांस) : 8400 करोड़ रुपए
👉 3. SAFRAN (फ्रांस) : 6300 करोड़ रुपए
👉 4. DRDO (भारत) : 9000 करोड़ रुपए
📌 ये चारों कंपनियां राफेल के अलग अलग मुख्य पार्ट्स बनाएंगी, जो इस प्रकार है.. 👇
👉 THALES : इलेक्ट्रॉनिक रडार और एयरक्राफ्ट में काउंटर मेजर्स बनाएगी.
👉 DASSAULT : एयरफ्रेम और सिस्टम इंटीग्रेशन बनाएगी.
👉 SAFRAN : M88 इंजन और लैंडिंग गीअर बनाएगी.
👉 DRDO : डिजाइन किए गए स्वदेशी "कावेरी जेट इंजन" को पूर्वरूप में लाने के लिए विशेषज्ञता की दिशा में जाएगा.
📌 "कावेरी जेट इंजन" क्या है..??
👉 कावेरी को बैंगलोर में डीआरडीओ की गैस टर्बाइन रिसर्च इस्टेब्लिशमेंट (GTRE) द्वारा डिजाइन किया गया था. SAFRAN जो राफेल को शक्ति देने वाले M88 इंजन बनाता है, को उड़ान भरने योग्य बनाएगा जबकि DASSAULT इसे विमान में एकीकृत करेगा.
📌 भारत और फ्रांस सरकार के बीच हुई गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील में फ्रांस की तीनों मुख्य कंपनियां (THALES, DASSAULT, SAFRAN) राफेल जेट के अन्य पार्ट्स के लिए भारत में अपने सहयोगी पार्टनर्स चुनने को स्वतंत्र है..
📌 इसी के अन्तर्गत इन तीनों मुख्य कंपनियों ने राफेल जेट के अन्य पुर्जे बनाने के लिए भारत में, भारत की कई कंपनियों को अपना पार्टनर बनाया है, "रिलायंस" के अलावा डसॉल्ट की लगभग 100 कंपनियों से बातचीत चल रही है जिसमें से उसने 30 कंपनियों को ऑफसेट पार्टनर के रूप में चुना है. ये सभी सहयोगी कंपनियां राफेल के विभिन्न छोटे, बड़े पार्ट्स बनाएंगी.
📌 डसॉल्ट के सीईओ "एरिक ट्रैपियर" ने साफ किया है कि रिलायंस के साथ डसॉल्ट का संयुक्त उद्यम (ज्वाइंट वेंचर) "DRAL" के "ऑफसेट ऑब्लिगेशन" में रिलायंस की सिर्फ 10% की ही हिस्सेदारी है.
📌 रिलायंस को कुल ऑफसेट धनराशि का 10% ही मिल रहा है. मतलब रिलायंस का जॉइंट वेंचर केवल Dassault के साथ हे तो उसे केवल 8400 करोड़ रूपये के 10 परसेंट का, यानि 840 करोड़ रुपए का ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट मिला है ।
अन्य दोनों फ़्रांसिसी कंपनिया भारत की 100 से ज्यादा कॉम्पिनियो से कार्य करेंगी, जैसे L&T Grasim, इत्यादि ।
🙌 राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप आधारहीन होने के साथ साथ तथ्यहीन भी है, जिसका कोई सर पैर नहीं है. राहुल गांधी देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे है, मोदी सरकार को घोटालेबाज सरकार और मोदी को बेईमान नेता साबित कर के किसी तरह ये सत्ता में वापस आना ही एकमात्र विपक्ष+ठगबंधन का लक्ष्य है. पूरा विपक्ष सिर्फ मोदी को हटाना चाहता है, इनके नेताओ के मुंह से सिर्फ और सिर्फ एक ही शब्द सुनने को मिलता है, मोदी हटाओ, मोदी हटाओ...
*चोर बोले जोर से* मगर कबतक ?
इससे यह साबित होता है कि ये सब नेता 60 वर्षो से आज तक देश की जनता को लूटते आ रहे थे, उसके बीच में मोदी जी आ गए है, अब ये सारे घोटालेबाज/भ्रष्ट/मक्कर/धूर्त नेता एक तरफ, बीच में नरेंद्र मोदी और दूसरी तरफ देश की सवा सौ करोड़ जनता...

Tuesday, 1 January 2019

नव वर्ष 2019 व 2076

नमस्कार दोस्तों,
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये

नव वर्ष 2019 शुरू हुआ, बहुत सी शुभकामनाये मिली, आज इनबॉक्स खोला तो 800 से अधिक व्यक्तियों ने  संदेश भेजे थे, संघ का कार्यकर्ता होने के कारण कई हिंदूवादी कार्यकर्ताओ से मेरा सम्पर्क है इन सब के भी बहुत से संदेश आये थे, परन्तु बहुत से संदेश नकारात्मक थे उनमे कहा गया था की यह हमारा नव वर्ष नहीं हमारा नव वर्ष तो वर्ष प्रतिपदा से शुरू होगा व बहुत से तथ्यों के साथ बताया हुआ था की यह नव वर्ष शराबियो का है जबकि हमारा नव वर्ष मंदिरो से शुरू होता है ।

मै इस बात को सही मानता हु की यह नव वर्ष शराबियो का है  व हिन्दू नव वर्ष एक दम स्टिक है क्योकि हिन्दू नव वर्ष के साथ ही ऋतू परिवर्तन होता है प्रकृति में बदलाव आता है, किसानो की फसल तैयार हो जाती है प्रकृति में चुस्ती आ जाती है परन्तु  इस समय हमारे कैलेंडर को वैश्विक मान्यता प्राप्त नहीं है, गलती इस समय विश्व की नहीं हमारी है, हमारे पास अब दो रास्ते है एक यह की जो कैलेंडर वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है उसी को मानकर हम आगे बढ़े व सकारात्मक संदेश भेजे । दूसरा हम अपने केलिन्डर को अपना ना बोलकर विश्व का बोले तथा उसे वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलवाये। नकारत्मक संदेश फैलाना इसका हल नहीं है । यदि हमे हल निकलना है तो हमे अपने कैलेंडर को विश्व तक पहुंचना होगा तथ हमरे नव वर्ष पर सकारत्मक संदेश फ़ैलाने होंगे, नकारात्मक संदेश फ़ैलाने से हमारा भी दिमाग चिड़चिड़ा सा होने लगता है तथा  सामने वाले के सामने हमारी नकारात्मक छवि बनती है ।

जय श्री राम