आज कल राजनीति में एक ट्रेंड चल गया है , विपक्ष मानता है की अगर वह हिन्दुओ को गलत साबित कर देंगे तो सरकार को बुरा साबित कर देंगे इसीलिए विपक्ष के नेता सरकार को बुरा बोलते बोलते आजकल हिन्दुओ को ही गालिया देने में उतर आये है, यह वही लोग है जो कहते है आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता परन्तु एक छोटी सी मुठभेड़ का धर्म इन्होने ढूंढ निकला है घटना परसो यानि होली वाले दिन की है , यह एक आम झड़प थी जो अक्सर गली पड़ोस में होती रहती है पुलिस इस पर कार्यवाही भी करती है । मै भिवानी का निवासी हु परसो यहाँ एक गुंडा भी पकड़ा गया जो बड़े पदों पर रह चूका है। परन्तु मैन स्ट्रीम मीडिया में इसका कोई असर नहीं दिखा क्योकि इस खबर में उनको कोई मसाला नहीं मिला इस खबर में उनको हिन्दुओ को बुरा साबित करने का अवसर नहीं मिला ।
परन्तु गुरुग्राम में हुयी घटना अचानक मैन स्ट्रीम में इसीलिए आ गयी क्योकि उसमे इन्हे हिन्दू मुस्लिम दिखा, और हमेशा की तरह विपक्ष को एक बहाना मिल गया हिन्दू मुस्लिम में दरार पैदा करने का और पेश है अरविन्द केजरीवाल जी का ट्वीट
उसके बाद अखिलेश यादव जी का ट्वीट
AKHILESH YADAV ON TWITTER
चलो इन दोनों के ट्वीट से एक बात तो साबित हो गए की हिन्दुओ की एक ही पार्टी ही "भाजपा"
अगर आप विपक्ष के सांप्रदायिक होने से सहमत नहीं है तो मै आपसे सिर्फ 3 सवाल पूछना चाहूंगा जिस से आप मेरी बात से सहमत हो जायेंगे ।
१। दिल्ली में दिन दहाड़े रोड के बीच गोलिया चलती है उस पर केजरीवाल जी कुछ क्यों नहीं बोले?
२। केजरीवाल जी को आतंकवाद का धर्म नहीं दीखता परन्तु गुंडों को धर्म कैसे दिख जाता है ?
३। अगर सवाल सिर्फ प्रशासन पर उठाना था तो ट्वीट में इतनी बार हिन्दू शब्द का इस्तेमाल क्यों किया ?
इनका मुख्य मकसद सिर्फ हिन्दू धर्म पर सवाल उठा कर सरकार को घेरने को होता है , क्योकि इनको लगता है की यह सरकार हिन्दुओ की सरकार है । वह यह भूल गए की अगर अल्पसंख्यको के लिए सबसे अधिक काम हुआ है तो इसी सरकार में हुआ है जिसमे तीन तलाक बिल शामिल है ।
ऊपर सभी बातो का एक ही निष्कर्ष यह विपक्ष साम्प्रदायिक राजनीति करके देश के माहौल को खराब करना चाहता है ।

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