People at train at the time of partition to protect their life
सोचिये आप एक ट्रैन में आ रहे है, और उस ट्रैन पर एक बहुत बड़ा हमला हो रहा है, आपके साथ जितने भी लोग है सबको एक एक करके मारा जा रहा है पूरी ट्रैन भरी हुयी है, ट्रैन में निचे जगह नहीं होने के कारन लोग छतो पर चढ़े हुए है, वहाँ भी जगह नहीं होने के कारन बहुत से लोग नहीं चढ़ पाए। आप किसी तरह जद्दोजहद करके ट्रैन में चढ़ गए, परन्तु आपके बहुत से घर परिवार वाले ट्रैन में नहीं चढ़ पाए। आप ट्रैन में तो चढ़ गए परन्तु अभी भी ट्रैन में जितने लोग है उनको मारने की कोशिश की जा रही है,ट्रैन में बहुत सारी लाशे पड़ी है । कैसा लगा सोचकर ? रूह काँप गयी ना! मेरी तरह आपके भी रोंगटे खड़े हो गए होंगे। सुनकर ऐसा लग रहा है किसी बड़ी फिल्म का एक दृश्य है , अगर मै आपको बताऊ की यह कोई फिल्म का दृश्य नहीं बल्कि 1947 की एक सच्चाई है। मै यह सब इसीलिए बता पा रहा हु क्योकि मै भी एक ऐसे ही परिवार से सम्बन्ध रखता हु ।
People at train at the time of partition to protect their life
मेरा जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ। बचपन में मेरी माता जी ने शिक्षा पर जोर दिया, कमाई के अच्छे संसाधन ना होने के बावजूद मेरी शिक्षा पर बहुत जोर दिया गया , मेरे प्रथम विद्यालय में लगभग मेरे जैसे ही सहपाठी आया करते थे, मेरी इंटर की पढाई के लिए मुझे बड़े विद्यालय में भेजा गया, राजनीति के कारण मुझे कई बार कह दिया जाता था " तुम लोग मुल्तान से आये है।" पहली बार मुझे हमारी सच्चाई का एहसास होना शुरू हुआ परन्तु इस बात को सहते हुए मैंने इस विषय में शोध करना शुरू किया, जैसा की हमारे देश में कहा जाता है सबसे ज्यादा ज्ञान बुजुर्गो के पास को होता है इसीलिए सबसे पूर्व मैंने अपने क्षेत्र के बुजुर्गो से इस विषय में पूछना शुरू किया, हर किसी के पास इस विषय में अपनी कहानी थी, बहुत से बुजुर्गो ने इस घटना को अपनी आँखों से देखा था उनमे बहुतो ने अपने परिवार जनो को खोया है किसी का भाई यहां नहीं आ पाया तो किसी के पिता तो किसी की माता। मैंने जितनी कहानिया सुनी उन सभी को लिखने लगे तो एक पूरी किताब छप सकती है
RSS refugee camps at time of partition
मैंने इस विषय से जुड़े बहुत से लेख पढ़े , बहुत से प्रत्यक्षदर्शियों से मिला, देश का इतिहास पढ़ा उन सब में एक बात सामान थी, कि बटवारे का फरमान बहुत जल्दबाजी में बिना सोचे समझे सब पर थोप दिया गया इस बात का अनुमान किसी ने नहीं लगाया कि इसके परिणाम इतने भयानक होंगे , अगर उन्हें पहले से इसका अनुमान था तो भी लाखो लोगो कि मौत के दोषी वो लोग है, करोडो के विस्थापित होने के दोषी भी लोग है जिन्होंने बटवारे में अपनी सहमति सिर्फ सत्ता के लालच के लिए दी। जिस समय मै इन कहानियो को सुन रहा था उस समय मेरी उम्र बहुत कम थी (लगभग 15 वर्ष) मेरे दिल में इन बातो ने इतना स्थान बना लिया था कि मेरे सपने में वे ट्रैन आने लगी। देश का बटवारा धर्म के आधार पर कर दिया गया। देश को दो भागो में बाट दिया गया ( आज के समय में तीन- भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश)। करोडो लोगो से कह दिया गया कि आप यहाँ से जाइये नहीं तो आपको मार दिया जायेगा। बहुत से लोगो को मार भी दिया गया, पुरे विश्व का सबसे बड़ा साम्प्रदायिक दंगा कांग्रेस कि सहमति से हुआ, जिसमे करोडो ने अपने घर गवाए, लाखो ने अपनी जान परन्तु इस दंगे के बारे में आज भी देश के कई राजनितिक दल बात नहीं करते। उस समय वादा किया गया सभी विस्थापितों को न केवल नागरिकता दी जाएगी परन्तु उन्हें उनका मुआवजा भी दिया जायेगा । पिताजी बताते है जब दादा जी बटवारे से पहले वाला भारत छोड़ के आज के भारत में आये तो उन्होंने बहुत सी लड़ाईया लड़ी , पहली लड़ाई थी अपनों को खोने कि, दूसरी लड़ाई थी खुद कि जान बचने के लिए, तीसरी लड़ाई थी भारत आने के बाद रोटी, कपडा, मकान की। यह भी बताते है की इन सब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उनकी बहुत मदद की , समय पर भोजन दिया, विस्थापित होकर आये लोगो के लिए शरणार्थी कैंप लगाए, जब तक एक एक हिन्दू भारत नहीं पहुंच गया तब तक बॉ र्डर पर शर्णार्थीओ की सेवा के लिए डटे रहे। यह सब बाते तो उस समय जो लोगो ने भुगता उसकी थी।
परन्तु आज भी बहुत से परिवार वही लड़ाई लड़ रहे थे, आज भी वहाँ से बहुत से परिवारों को नागरिकता नहीं मिल पायी है आखिर क्यों ? उन परिवारों को विपक्ष पाकिस्तानी, बांग्लादेशी बुलाता है। क्या वह लोग बांग्लादेशी है ? क्या वह लोग पाकिस्तानी है ? नहीं ! वह लोग बस गंदी राजनीति का शिकार हुए तब भी उन्हें साम्प्रदायिकता कि आग में जलना पड़ा आज भी वे देश में बैठे उन्ही राजनीतिज्ञों से लड़ रहे है जिन्हे बस सत्ता से लोभ है, वह लोग तब भी भारत में रह रहे थे, आज भी भारत में रह रहे है, देश को पाकिस्तान बांग्लादेश तुमने बनाया है उन्हें आज भी अपने भारत में रहना है और यह उन लोगो का अधिकार है, उस समय जो हिन्दू परिवार भारत नहीं आ पाए या उनकी अपने घर को ना छोड़ने की जिद थी कि वो वही (जिसका नाम आज पाकिस्तान व बांग्लादेश है) रहेंगे। उन लोगो के लिए जुल्मो का एक नया अध्याय और शुरू हुआ। उन्हें वहाँ तंग किया जाने लगा उनकी घर की लड़कियों का अपहरण व बलात्कार किया जाने लगा । इस्लाम कुबूलने पर मजबूर किया जाने लगा, इसीलिए वहाँ रहने वाले हिन्दू इन सब से तंग आकर आज के भारत आने लगे। उन्होंने उस वक्त की सरकार के वादे के अनुसार नागरिकता मांगनी शुरू कर दी , कांग्रेस की सरकार वादा करती रही नागरिकता देंगे परन्तु कुछ नहीं किया। आज भी हम दिल्ली के बहुत से इलाको में उन हिन्दुओ को देख सकते है जो कहते है हमे नागरिकता दे दो या मार दो पर वापिस ना भेजो। वहाँ के जुल्मो से वह लोग इतने तंग है की वह मरना चाहते है पर वापिस जाना नहीं। प्रधानमंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह जी ने 2003 में संसद बोला कि वे सभी को नागरिकता देंगे परन्तु नहीं दी।
वक्त बदला सत्ता में भाजपा सरकार आयी भाजपा सरकार ने उन भी को उनका हक नागरिकता देने के लिए कानून लायी । अब इसमें विरोध कैसा ? कांगेस का भी तो वादा यही था और यह तो उनका हक़ ही है! जिस हक का वादा कांग्रेस सरकार कर रही थी वह वादा भाजपा ने पूरा किया बल्कि उसे तो भजपा का साथ देना चाहिए क्योकि यह वादा तो कांगेस 70 सालो से कर रही है । जगह जगह विरोध किस नाम पर हो रहे है, मुस्लिमो को भड़काने की बजाये उन्हें यह क्यों नहीं समझाया जा रहा की नागरिकता तो इन लोगो की जन्मसिद्ध अधिकार है। बाकी के विपक्ष के लोग यह क्यों नहीं समझ रहे है कि अगर बटवारा नहीं होता तो इन लोगो को कोई जरूरत नहीं थी प्रमाण देने की। अपने ही देश में आज विदेशियों की तरह आज घूमते हिन्दुओ के बारे में कोई नहीं सोच रहा। हिन्दुओ का इतिहास रहा है जो भी विदेश से आया है उनको अपने देश में शरण दी है चाहे वह मुग़ल हो चाहे वह पारसी या अंगेज। हिन्दू तो हमेशा से पुरे विश्व को एक परिवार मानता है परन्तु आज स्तिथि यह है की आज अपने ही देश में हिन्दू विदेशी की तरह रह रहे है उनके पास उनके हक नहीं है । देश में रह रहे सभी लोगो को यह बात समझनी चाहिए और देश को फिर से साम्प्रदायिकता कि आगे में नहीं झोकना चाहिए ।
आखिर में बस मै नरेंद्र मोदी जी को लाखो हिन्दुओ को उनका हक देने के लिए धन्यवाद देना चाहूंगा और बाकि विरोधी संठनो से अपेक्षा करूंगा की वह भी इस बात को समझेंगे।
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